राहुल गांधी बिहार में मोदी पर व्यक्तिगत हमला क्यों कर रहे हैं
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का व्यक्तित्व केवल भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष महत्व रखता है। गुजरात में अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल से लेकर 2014 में प्रधानमंत्री बनने तक मोदी ने अपने नेतृत्व, कार्यकुशलता और विकास मॉडल के माध्यम से अपनी राजनीतिक छवि को ऊँचाई पर पहुँचाया। वर्तमान में देश के किसी भी राज्य में चुनाव हों, मोदी का प्रभाव जन-जन तक पहुँच चुका है। यही कारण है कि भाजपा और उसका गठबंधन आज एक मजबूत राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित है। बिहार विधानसभा चुनावों में भी मोदी की लोकप्रियता मतदाताओं के बीच गहराई से जमी हुई है, जबकि अन्य दल अभी भी अपने जनाधार को सुदृढ़ करने में संघर्ष कर रहे हैं।
राहुल गांधी इस प्रभाव को चुनौती देने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस का जनाधार बढ़ाने की रणनीति के तहत वह प्रधानमंत्री मोदी को सीधे निशाने पर लेते रहे हैं। चाहे मतदाता सूची में संशोधन (SIR) का मुद्दा हो या लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर बहस, राहुल गांधी अक्सर मोदी सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने और वोट चोरी जैसे आरोप लगाते हैं। उनका कहना है कि मोदी सरकार ने छोटे उद्योगों, मध्यमवर्ग और पिछड़ी जातियों के हितों की अनदेखी की है। नोटबंदी और जीएसटी जैसी नीतियों के कारण छोटे व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ, वहीं मेड इन चाइना उत्पादों की बढ़ती बिक्री से स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिल पा रहा है।
राहुल गांधी का मोदी पर सीधा हमला केवल नीतिगत नहीं, बल्कि रणनीतिक भी है। वह यह संदेश देना चाहते हैं कि देश की मौजूदा समस्याएँ केवल सरकार की नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत निर्णयों का परिणाम हैं। बिहार चुनावों के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि अगर मोदी सत्ता में बने रहे तो बिहार में कोई बदलाव संभव नहीं है। उन्होंने अपने एक भाषण में यह भी कहा कि अगर मोदी से कहा जाए कि वोट के बदले नाचो तो वे स्टेज पर नाच जाएंगे। ऐसे बयान राहुल गांधी के उस राजनीतिक रुख को दिखाते हैं, जिसमें वे मोदी की छवि पर व्यक्तिगत टिप्पणी कर जनता का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास करते हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस और आरजेडी महागठबंधन सामाजिक न्याय, पिछड़ी जातियों, अल्पसंख्यकों और युवाओं के मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं। राहुल गांधी का मोदी पर व्यक्तिगत हमला इसी रणनीति का हिस्सा है। उनका उद्देश्य यह दिखाना है कि केंद्र और राज्य सरकारों ने पिछले दो दशकों में इन वर्गों के लिए पर्याप्त कार्य नहीं किया। उनका यह भी आरोप है कि नीतीश कुमार की सरकार भले ही राज्य स्तर पर काम कर रही हो, परंतु नियंत्रण भाजपा के हाथों में है।
राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा इसी राजनीतिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाती है। इस यात्रा के दौरान उन्होंने कहा कि यह केवल चुनावी अभियान नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और प्रत्येक मतदाता के अधिकार की रक्षा का आंदोलन है। उन्होंने लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों की समस्या, रोजगार की कमी, जीएसटी से प्रभावित व्यापार, सीमा सुरक्षा, और शहीद सैनिकों के प्रति सरकार के रवैये जैसे मुद्दों पर भी मोदी सरकार को घेरा।
कांग्रेस में राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के प्रमुख चेहरा और वैचारिक केंद्र माने जाते हैं। अधिकांश कांग्रेस नेता, राज्य इकाइयाँ और महागठबंधन के सहयोगी उन्हें भविष्य के प्रधानमंत्री पद का संभावित चेहरा मानते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद भी कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियाँ भारत जोड़ो यात्रा, संविधान बचाओ अभियान आदि राहुल गांधी की विचारधारा के इर्द-गिर्द केंद्रित हैं। हालांकि, भाजपा की तुलना में कांग्रेस में नेतृत्व अधिक परामर्शात्मक और सामूहिक स्वरूप में चलता है। मोदी का नेतृत्व जहाँ संगठन और सरकार दोनों पर निर्णायक नियंत्रण रखता है, वहीं कांग्रेस में राहुल गांधी का नेतृत्व अभी भी सामूहिक निर्णय प्रक्रिया पर आधारित है। राहुल गांधी को कांग्रेस की नई पीढ़ी एआईसीसी, युवा कांग्रेस और एनएसयूआई प्रेरणास्रोत मानती है। उनकी सक्रियता और मुखर राजनीतिक शैली से कांग्रेस पार्टी बिहार सहित अन्य राज्यों में अपनी राजनीतिक ज़मीन वापस पाने की कोशिश कर रही है।
Chose One of the Following Methods.
Sign in Using Your Email Address
Allow Election Mantra to send latest news notifications.