बिहार में छठ और वोट का क्या है रिश्ता? कौन कैसे मना रहा है व्रतियों को

बिहार में छठ और वोट का क्या है रिश्ता? कौन कैसे मना रहा है व्रतियों को

पूर्व की छठ पूजा तथा घाट के नवीनीकरण की तैयारी

बिहार में छठ और वोट का क्या है रिश्ता? कौन कैसे मना रहा है व्रतियों को

बिहारवासियों के लिए छठ पूजा सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहारों में से एक मानी जाती है। वैसे तो सभी पूजा का अपना-अपना विशेष महत्व है, किंतु छठ पूजा सूर्य उपासना का महान पर्व है। इसमें उदयमान और अस्ताचल सूर्य दोनों को अर्घ्य दिया जाता है। श्रद्धालु व्रती सूर्यदेव और उनकी बहन छठी मैया से परिवार के सुख-समृद्धि, संतान-कल्याण और स्वास्थ्य की कामना करते हैं।

यह व्रत अपने आप में शुद्धता, संयम और सात्विकता का प्रतीक है, जो चार दिनों तक चलता है। यह पर्व सूर्य, जल, धरती और वायु जैसे प्राकृतिक तत्वों से सीधा जुड़ा है। छठ पूजा केवल घर की सीमाओं में नहीं, बल्कि समाज का सामूहिक लोक-त्योहार है, जिसमें सभी जाति और वर्ग के लोग एक साथ भाग लेते हैं। परंपरागत रूप से यह व्रत महिलाओं का होता है, किंतु अब पुरुष भी बढ़-चढ़कर इसमें हिस्सा ले रहे हैं। छठ पूजा स्त्री शक्ति, तपस्या और समर्पण का प्रतीक बन चुकी है।

छठ और बिहार विधानसभा चुनाव का रिश्ता

इस वर्ष छठ पूजा और बिहार विधानसभा चुनाव लगभग एक ही समय पर पड़ रहे हैं, जिससे राजनीतिक दलों के लिए यह एक बड़ा अवसर बन गया है। सभी दल मतदाताओं को रिझाने और उनसे जुड़ने की कोशिश में लगे हैं। जेडीयू के बिहार अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा है कि हमने भारत निर्वाचन आयोग से सुझाव दिया है कि चुनाव एक ही चरण में और छठ पूजा के तुरंत बाद हों ताकि बाहर रहने वाले मतदाता भी अधिक संख्या में अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।

वहीं, एनडीए ने प्रवासी मतदाताओं को घर लौटने और मतदान तक रुकने के लिए विशेष रणनीति बनाई है। सूत्रों के अनुसार, छठ पूजा के बाद लौटने वाले प्रवासियों को चुनाव अवधि तक रोकने की भी कोशिशें की जा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक जनसभा में कहा कि छठ पूजा के समय आप सभी इतनी संख्या में आए हैं, मिथिला का यह माहौल है कि बिहार नई गति से आगे बढ़ेगा जब फिर आएगी एनडीए सरकार। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छठ पूजा के बाद घर लौटने वाले प्रवासी बिहारी मतदाता इस बार के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इसीलिए एनडीए बूथ स्तर पर विशेष रूप से सक्रिय हो गया है।

केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय की भूमिका

बिहार विधानसभा चुनाव को देखते हुए केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय ने प्रवासी बिहारी कामगारों के घर लौटने, छठ पूजा में भाग लेने और मतदान में सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए विशेष इंतज़ाम किए हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि छठ और दिवाली के अवसर पर करीब 12,000 विशेष ट्रेन सेवाएँ चलाई जाएँगी, ताकि प्रवासी श्रमिक आसानी से बिहार लौट सकें। रेलवे ने प्लेटफॉर्म पर अतिरिक्त सुरक्षा बल, प्रतिक्षालय, टिकट काउंटर और सफाई व्यवस्था बढ़ाई है। हालांकि, व्यवहार में पूरी तरह सहजता और सुविधा उतनी नहीं दिख रही, जितनी घोषणा की गई थी। टिकटों की कमी और भीड़-नियंत्रण की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जून माह में विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए घोषणा की कि छठ पूजा, दिवाली और होली जैसे प्रमुख त्योहारों के अवसर पर प्रवासी बिहारियों की सुविधा के लिए विशेष बस सेवाएँ चलाई जाएँगी। इन बसों के माध्यम से दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों से बिहार को जोड़ने वाले अंतरराज्यीय मार्गों पर यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। 

जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुनाव से पहले ही दीपावली और छठ पूजा के अवसर पर प्रवासी बिहारियों को संदेश दिया था कि इस बार अधिक से अधिक संख्या में मतदान में हिस्सा लेकर जन सुराज पार्टी को विजयी बनाएं, ताकि उन्हें दोबारा अन्य राज्यों में काम की तलाश में जाने की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने कहा कि पार्टी की सरकार बनने पर युवाओं को दस से बारह हजार रुपये की नौकरी और स्वरोजगार के अवसर बिहार में ही उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वे अपने परिवार के साथ यहीं सम्मानपूर्वक जीवन जी सकेंगे।

महिलाओं पर चुनावी फोकस

बिहार विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस बार सभी राजनीतिक दलों ने महिलाओं को केंद्र में रखकर अपनी रणनीति तैयार की है। सभी पार्टियाँ महिलाओं और उनके बच्चों से जुड़ी योजनाओं व नारों के माध्यम से अधिक से अधिक सीटों पर कब्ज़ा जमाने की कोशिश में जुटी हैं। राजनीतिक दलों ने निर्वाचन आयोग से यह भी अनुरोध किया था कि मतदान की तिथि छठ पूजा के तुरंत बाद रखी जाए, ताकि प्रवासी मतदाता लौटने से पहले मतदान कर सकें। यह भी माना जा रहा है कि दो चरणों में मतदान कराना इस बार की रणनीति का हिस्सा है ताकि चुनाव प्रक्रिया अधिक सरल और प्रभावशाली हो सके। विश्लेषकों के अनुसार, छठ पूजा अब केवल धार्मिक पर्व नहीं रहा, बल्कि सामाजिक, प्रवासी और मतदाता रणनीति का संयुक्त आयाम बन चुका है।

दिल्ली में छठ पूजा और राजनीतिक संदेश

बिहार विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में दिल्ली में छठ पूजा इस बार राजनीतिक केंद्र बिंदु बन गई है। दिल्ली में बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड मूल की आबादी बड़ी संख्या में है, जिनका वोट बैंक कई विधानसभा क्षेत्रों में प्रभावशाली माना जाता है। दिल्ली सरकार ने इस बार लगभग 100 स्थानों पर अस्थायी घाट चिन्हित किए हैं, जहाँ पूजा समारोह सुचारु रूप से संपन्न होंगे। सरकार के अनुसार 1000 से अधिक मॉडल घाट तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें बिजली, टॉयलेट, सफाई और सुरक्षा की विशेष व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उनके मंत्री लगातार घाटों के निरीक्षण में व्यस्त हैं। यमुना नदी में उत्पन्न सफेद झाग की समस्या पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा दिल्ली सरकार ने इस बार डेढ़ दिन की सरकारी छुट्टी की घोषणा भी की है, ताकि श्रद्धालु बिना किसी बाधा के पूजा कर सकें।

छठ पूजा बिहार की आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है। इस बार यह पर्व केवल धार्मिक न होकर राजनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है।छठ पूजा, प्रवास और चुनाव ये तीनों एक साथ मिलकर इस बार बिहार की राजनीति में एक नया समीकरण बना रहे हैं, जहाँ आस्था और राजनीति दोनों घाट पर एक साथ उतरते दिखाई दे रहे हैं।

 

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