किस बूत्ते रोज बड़ी-बड़ी घोषणायें कर रहे हैं तेजस्वी
बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार घोषणाओं की झड़ी लगी है, परंतु राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव इस मामले में सभी दलों से आगे दिखाई दे रहे हैं। उनकी घोषणाएँ इतनी बड़ी और व्यापक हैं कि कई राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे वार्षिक बजट से अधिक खर्च वाली, जनता को लुभाने वाली और कुछ हद तक हास्यास्पद” तक कह रहे हैं। चुनाव मैदान में तेजस्वी यादव की घोषणाओं को देखकर यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है जितनी चादर हो, उतना ही पैर पसारो।
घोषणाओं की फेहरिस्त
तेजस्वी यादव ने इस चुनाव में कई बड़े वादे किए हैं। यदि राजद की सरकार बनी, तो हर परिवार में कम से कम एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। इसके लिए उन्होंने सरकार बनने के 20 दिन के भीतर नया कानूनलाने का वादा किया है। महिलाओं और जीविका दीदियों को लेकर उन्होंने कहा कि सभी को नियमित सरकारी कर्मचारी बनाया जाएगा, उनका मासिक वेतन 30,000 किया जाएगा,लोन माफ किए जाएंगे और 5 लाख का बीमा कवर दिया जाएगा। राज्य में निवेश बढ़ाकर नई फैक्ट्रियाँ लगाने, शिक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास को प्राथमिकता देने का भी वादा किया गया है। माई-बहिन मान योजना के तहत महिलाओं को हर माह 2,500,200 यूनिट बिजली फ्री,और 500 में रसोई गैस सिलेंडर देने का आश्वासन दिया गया है।साथ ही, उन्होंने महागठबंधन की ओर से स्वयं को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करवाकर कांग्रेस पर भी दबाव बना दिया है।
बजट और आर्थिक यथार्थ तेजस्वी यादव ने हाल ही में विधानसभा में राज्य का वार्षिक बजट 2025–26 भी प्रस्तुत किया,जिसका कुल आकार लगभग 3.7 लाख करोड़है। बजट का उद्देश्य आर्थिक समावेश और समान अवसर बताया गया है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी कई नई योजनाएँ शामिल हैं। ग्रामीण उद्यमिता के लिए 1,200 करोड़ और स्वयं सहायता समूहों के लिए विशेष सहायता निधि की घोषणा की गई है।
घोषणाओं की लागत बिहार के बजट से तीन गुना अधिक
राज्य में लगभग 2.76 करोड़ परिवार हैं,जिनमें से लगभग 20 लाख परिवारों के पास पहले से ही कोई सरकारी नौकरी है। यदि शेष 2.56 करोड़ परिवारों में से प्रत्येक को एक सरकारी नौकरी दीजाएऔर औसत वेतन 30,000 प्रतिमाह माना जाए,तो कुल वार्षिक खर्च होगा 2.56 करोड़ × 30,000 × 12 = 9.22 लाख करोड़ से अधिक। यह राशि बिहार के मौजूद बजट (3.7 लाख करोड़) से तीन गुना अधिक है। अर्थात केवल इस एक घोषणा को लागू करने के लिए राज्य को अपने पूरे बजट से लगभग 5.5 लाख करोड़ अतिरिक्त खर्च करना होगा,जो वित्तीय रूप से असंभव प्रतीत होता है।
राजनीतिक और आर्थिक विश्लेषण
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि तेजस्वी यादव की घोषणाएँ जनता को आकर्षित करने के उद्देश्य से अवश्य प्रभावशाली हैं,परंतु राज्य की वास्तविक आर्थिक स्थिति और संसाधनों को देखते हुएये वादे अव्यवहारिक और अव्यावहारिक हैं। बजट और राजकोषीय अनुशासन की सीमाओं को देखते हुए ऐसे वादे राज्य की वित्तीय स्थिरता को संकट में डाल सकते हैं। इसी संदर्भ में जनता के बीच यह कहावत भी चर्चा में है, अंधेर नगरी, चौपट राजा। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में तेजस्वी यादव निस्संदेह घोषणाओं की राजनीति में सबसे आगे हैं,परंतु उनकी योजनाओं का पैमाना राज्य की आर्थिक वास्तविकता से कहीं अधिक बड़ा दिखाई देता है। राजनीति में सपने दिखाना आवश्यक है,परंतु जब सपने राज्य के बजट से तीन गुना बड़े हों,तो वे हास्य और चिंता दोनों का विषय बन जाते हैं।
Chose One of the Following Methods.
Sign in Using Your Email Address
Allow Election Mantra to send latest news notifications.