आखिर प्रधानमंत्री क्यों चिन्तित हैं नेपाल को लेकर

आखिर प्रधानमंत्री क्यों चिन्तित हैं नेपाल को लेकर

नेपाल सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री मोदी चिन्तित

आखिर प्रधानमंत्री क्यों चिन्तित हैं नेपाल को लेकर 

भारत के पड़ोसी देश नेपाल इस समय सियासी आग में जल रहा है और इसकी गूंज दिल्ली तक महसूस की जा रही है। नेपाल में प्रधानमंत्री के इस्तीफे और सड़कों पर फैली हिंसा के बीच प्रधान मंत्री मोदी ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए एक ऐसा संदेश दिया है जिसके कई रणनीतिक मायने हैं। 

 प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया में जीवन की हानि और सामाजिक दुष्प्रभावों पर भी अपनी चिंता जताई है। भारत ने नेपाल के भीतर सुरक्षा की स्थिति को लेकर गैर-हस्तक्षेपवादी, लेकिन अनुरोध और समर्थन की नीति अपनाई है साधारण भाषा में कहा जाए तो भारत चाहता है कि तनाव रहित संवाद हो और हिंसा बंद हो। यह संदेश सामरिक नज़रिए से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नेपाल की स्थिति क्षेत्रीय शांति-स्थिरता से जुड़ी हुई है, जो भारत के लिए बहुत आवश्यक है।

इसीलिए भारत हमेशा चाहता है कि नेपाल राजनीतिक रूप से स्थिर, शांतिपूर्ण और भारत के साथ सहयोगी बना रहे। भारत और नेपाल के बीच लगभग 1,770  किलोमीटर की खुली सीमा है, जो बिना वीजा-पासपोर्ट के आवागमन की जा सकती है। अगर नेपाल में हिंसा या राजनीतिक अस्थिरता होती है, तो आतंकवादियों, अपराधियों और तस्कर गिरोहों के लिए सीमा पार करना आसान हो जाता है। इससे भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, और पश्चिम बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों की सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगता है। नेपाल में पहले भी माओवादी विद्रोह हो चुका है (1996–2006)। यदि वैसी गतिविधियाँ दोबारा शुरू होती हैं, तो उनका प्रभाव भारतीय माओवादी नेटवर्क पर भी पड़ सकता है। नेपाल के रास्ते बांग्लादेश,पाकिस्तान, अफगानिस्तान, म्यांमार और अन्य दक्षिण एशिया देशों के शरणार्थी या अवैध प्रवासी भारत में आसानी से आ जाते हैं।  

नेपाल में अस्थिरता से भारत पर सीमा पर घुसपैठ, शरणार्थी संकट और व्यापार में बाधाओं जैसे कई नुकसान हो सकता है। दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करने के लिए सहमत हैं। नेपाल में अस्थिरता के कारण अवैध प्रवासियों की संख्या बढ़ा सकती है तथा चीन के प्रभाव को बढ़ा सकती है। जो भारत के राष्ट्रीय हितों के लिए सबसे बडा चिंताजनक हो सकता है। भारत नेपाल की अशांति को सिर्फ एक पड़ोसी देश की समस्या नहीं मानता, बल्कि यह भारत की आंतरिक सुरक्षा, विदेश नीति, और क्षेत्रीय संतुलन से भी जुड़ा मुद्दा है। भारत और नेपाल के लोगों के बीच मजबूत धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध हैं, विशेष रूप से हिन्दू और बौद्ध धार्मिक परंपराओं के माध्यम से। भारत के कई लोग नेपाल में और नेपाल के कई लोग भारत में काम करते हैं या बसे हुए हैं उनकी सुरक्षा को लेकर भारत चिंतित रहता है। नेपाल में हुए हिंसा के बाद जेल से फरार हुए 30 कैदियों को भारत में गिरफ्तार कर लिया है। ये सभी गिरफ्तारियां यूपी, बिहार तथा पश्चिम बंगाल से हुई है। आंध्र प्रदेश सरकार नेपाल में फंसे 200 से ज्यादा तेलुगु लोगों को सुरक्षित वापस भारत लाने की पूरी कोशिश में जुटी है। 

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