क्रिकेट हो या जंग का मैदान, हर बार पीछे छूटता है पाकिस्तान

क्रिकेट हो या जंग का मैदान, हर बार पीछे छूटता है पाकिस्तान

क्रिकेट हो या जंग का मैदान, हर बार पीछे छूटता है पाकिस्तान

भारत एवं पाकिस्तान के बीच क्रिकेट हो या फिर युद्ध पाकिस्तन हर बार मुंह की खाता रहा है। कल खेले गए एशिया कप 2025 के तहत ग्रुप स्टेज मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को 7 विकेट से रौंद दिया। पाकिस्तान के खिलाफ हुए एक तरफा जीत को कप्तान सूर्य कुमार यादव ने सशस्त्र बलों को समर्पित किया और साथ ही कहा कि हम पहलगाम हमले के पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं। ये महज एक बयान नहीं था, बल्कि टॉस से लेकर खेल के अंत तक भारतीय खिलाड़ियों में उनके हाव-भाव से विरोध की भावना स्पष्ट दर्शा रहा था। टॉस के समय सूर्या ने जहां पाकिस्तानी कप्तान से हाथ नहीं मिलाया, वहीं दुसरी तरफ जीत के बाद सीधे ड्रेसिंग रूम चले गए। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे पुछे गए सवाल में उन्होंने कहा कि जीवन में कुछ चीजें खेल भावना से भी आगे होती हैं। हम पहलगाम के पीड़ित परिवारों के साथ हैं और यह जीत सशस्त्र बलों को समर्पित है। पूर्व क्रिकेटर राशिद लतीफ भारतीय खिलाड़ियों के हाथ न मिलाने  के फैसले से ज्यादा ही बिलबिलाए हुए थे।

      2023 के विश्व कप के दौरान पाकिस्तान की टीम भारत आई थी, उस समय श्रीलंका से मुकाबले के बाद पाकिस्तानी विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान ने एक पोस्ट किया था, जिस पर बवाल मच गया था। इस पोस्ट में रिजवान ने गाजा का समर्थन किया था। तब गाजा पर हमास का कब्जा था और हमास के आतंकियों ने इजरायल में हमला किया था और सैकड़ों लोगों को मार दिया। इस हमले के बाद इजरायल ने गाजा में बमबारी करके हमास के ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। रिजवान का ये पोस्ट उनकी कट्टर इस्लामिक सोच का दर्शा रहा था,क्योंकि गाजा में मरने वालों में कुछ आम लोग भी थे और वे मुस्लिम थे। इसी विश्व कप में नीदरलैंड्स के खिलाफ मैच में ड्रिंक्स के दौरान रिजवान बीच मैदान में नमाज अदा करने लग गए थे, जिसको लेकर खूब बवाल हुआ। ऐसे में सूर्या के बयान पर जो पूर्व पाकिस्तानी खिलाड़ियों की बिलबिलाहट है, वह समझी जा सकती है। क्योंकि एक तरफ, भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में पाक को धूल चटाई और उसके बाद भारतीय खिलाड़ियों ने दुबई में पाक टीम को घुटनों पर ला दिया।

       पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान का यह पहला मैच था। उस हमले में 26 लोगों को आतंकियों ने उनका धर्म पूछकर मौत के घाट उतार  दिया था। इस क्रूरतापूर्ण घटना से पूरा देश का गुस्सा चरम पर था। भारत सरकार ने इसके बाद सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया था। वहीं भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाक के 9 आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। भारत की इस कार्रवाई के बाद पाक सेना ने सीमा पर रिहायशी इलाकों को निशाना बनाना शुरू किया तो भारतीय सेना के लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों और को तबाह कर दिया। भारत के हमले में हुए भारी नुकसान के बाद पाकिस्तान ने सीजफायर का अनुरोध किया था, जिसे भारत ने स्वीकार कर लिया था।

      भारत और पाकिस्तान के बीच पहला युद्ध 1947-1948 में जम्मू और कश्मीर के भारत में विलय के बाद पाकिस्तान समर्थित कबायली लड़ाकों ने कश्मीर पर हमला किया। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में मामला उठाया, युद्धविराम हुआ और नियंत्रण रेखा बनाई गई. कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में चला गया जिसे आज पाक अधिकृत कश्मीर कहा जाता है। दूसरा 1965 उसके बाद 1971 तथा 1999  कारगिल युद्ध सभी में भारत ने पाकिस्तान को करारा जवाब देता रहा। उसके बाद भी पाकिस्तान द्वारा आतंकवादी गतिविधि होता रहा है, लेकिन भारत ने हमेशा मुंह तौर जवाब देकर हमेशा अपना झंडा ऊंचा रखा। 

      पाकिस्तान के हार का मुख्य के कारण भारतीय सेना के बेहतर तैयारी और नेतृत्व रहा है। भारत को वैश्विक स्तर पर ज्यादा समर्थन मिला है। पाकिस्तान आक्रमण की शुरूआत करता है, पर लंबे समय तक टिक नहीं पाता।  1971 में बांग्लादेश का निर्माण पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी हार थी जिसमें 90,000 सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया । दूसरी तरफ भारत ने पाकिस्तान को आईसीसी विश्व के एक दिवसीय मैच में अब तक हुए सभी आठ मैच जीतकर धूल चटाई है। टी-20 विश्व कप में भी भारत का रिकार्ड पाकिस्तान से बेहत्तर रहा है।  पाकिस्तान क्रिकेट खिलाड़ियों में मानसिक दबाव में हमेशा खराब प्रदर्शन रहा है। भारतीय खिलाड़ियों में अनुभव व संयम तथा मजबूत क्रिकेट सिस्टम है। आईपीएल जैसे लीग मैच आदि। भारत-पाकिस्तान के बीच जंग हो या क्रिकेट हर मोर्चे पर पाकिस्तानी रणनीति एवं हौसला दोनों में चूक होना स्वभाविक है। भारत हमेशा सबल रहा है और आगे भी रहेगा। 

 

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