फ्रांस में सरकार नीतियों के खिलाफ जनता जोरदार का प्रदर्शन
फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों ने सेबास्टियन लेकोर्नू को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया। वे लगभग एक वर्ष में देश के चौथे प्रधानमंत्री बने हैं। लेकोर्नू का ताज पहनने का समय राजनीतिक अस्थिरता की अवधि में आया है, और उन्होंने संसद में विभाजित दलों के बीच समझौता करके 2026 का बजट पारित कराने का लक्ष्य रखा है।
नेपाल के बाद अब फ्रांस में भी सरकार नीतियों के खिलाफ जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पडा। जानकारी के अनुसार लगभग एक लाख लोगों ने सड़कों पर उतर गए एवं जगह-जगह हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की खबरें आ रही है। सरकार विरोधी इस बड़े प्रदर्शन ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है, खासतौर पर राजधानी पेरिस को जहां प्रदर्शन सबसे उग्र रूप में दिखे। कई प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। सार्वजनिक इमारतों में भी तोड़फोड़ की गई। हालात को देखते हुए 80,000 हजार से ज्यादा पूरे देश में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया। पेरिस में लगभग 5000 हजार पुलिसकर्मी हैं। फ्रांस के गृहमंत्रालय के अनुसार 200 से ज्यादा उपद्रवियों को गिरफ्तार किया गया है। कई पुलिसकर्मी भी इस हिंसा में घायल हुए हैं।
प्रदर्शन का मुख्य वजह मंहगाई, बेरोजगारी तथा सरकार की नीतियों में पारदर्शिता की कमी तथा नागरिक स्वतंत्रताओं पर पाबंदी जैसे विषय शामिल है। जनता का कहना है कि राष्ट्रपति मैक्रों की सरकार सिर्फ अमीरों के हित में फैसला ले रही है और आम जनता को नजरअंदाज कर रही है। नेपाल की तरह यहां भी सोशल मीडिया बना विरोध का हथियार।
बहरहाल फ्रांस में हो रहा ये आंदोलन सिर्फ स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक लोकतांत्रिक असंतोष का हिस्सा बनता जा रहा है। चाहे नेपाल हो या फ्रांस, युवा अब चुप नहीं रहना चाहते। वे जवाब मांगते हैं, भागीदारी चाहते हैं और परिवर्तन की मांग कर रहे हैं। पेरिस में बुधवार को श्रम मंत्रालय के बाहर सैकड़ों कर्मचारियों ने वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
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