नेपाल के युवा नेता बालेन्द्र शाह Gen Z वर्ग में वे एक उम्मीद की किरण बने
नेपाल के युवा नेता बालेन्द्र शाह का जन्म 27 अप्रैल 1990 को नारदेवी, काठमांडू में हुआ था। उनके पिता राम नारायण शाह एक आयुर्वेदिक चिकत्सक थे। उन्होंने स्नातक तक की पढ़ाई की। स्कूल के दौर में उन्हें संगीत में रुचि था। राजनीतिक भूमिका: 2022 के स्थानीय चुनावों में, बालेन शाह ने किसी भी प्रमुख राजनीतिक पार्टी के समर्थन के बिना—स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में—काठमांडू महापौर चुनाव जीता। वे काठमांडू के 15वें (और पहले स्वतंत्र) महापौर बने।
वर्ष 2023 में टाइम मैगजीन ने बालेन्द्र शाह को टॉप 100 उभरते नेताओं की सूची में शामिल किया था, जबकि न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे वैश्विक मीडिया ने भी उनकी तारीफ की। बालेन्द्र शाह की लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें नेपाल की राजनीति में नई उम्मीद माना जा रहा है। नेपाल के युवाओं के आक्रोश ने देश में राजनीतिक-सामाजिक उथल-पुथल पैदा कर दी है। आक्रोशित जेन-जी (युवाओं) की भीड़ ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रियों के घरों को आग लगा दी। इसके अलावा देश की संसद, सुप्रीम कोर्ट और कई सरकारी इमारतों में भी आगजनी की गई। उधर भारत ने हालात को देखते हुए चिंता जाहिर की है। हालात को देखते हुए एयर इंडिया, इंडिगो और नेपाल एयरलाइंस ने दिल्ली से काठमांडू जाने वाली उड़ानों की रद्द कर दिया है।
बालेन्द्र शाह के गीत भ्रष्टाचार और सामाजिक असमानता पर तीखा प्रहार करते थे, जिनके कारण वे जनता में लोकप्रिय हुए। महापौर के रुप में काठमांडू में ठोस कचरा प्रबंधन की समस्या को लेकर संबोधित किया। सिस्दोल लैंडफिल का दौरा और स्थानीय निवासयों की शिकायत सुनना, जब तक समस्या का हल नहीं हो जाए तब तक किसी प्रकार का जश्न नहीं मानना ये सभी गुण उल्लेखनीय रहा। अवैध निर्माणों और नदी तट पर बसे हुए स्लमों को हटाने का काम किया। नगर निगम की बैठकों का लाइव प्रसारण शुरू किया, जिससे प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ी। उन्होंने नगर कार्यपालिका और नगर सभा में बहुमत न होने, नौकरशाही बाधाओं और उच्च उम्मीदों से निपटना पड़ा; ये चुनौतियाँ जनता से मिली प्रतिक्रिया और राजनीतिक पार्टियों की रोक‑टोक के रूप में सामने आईं। युवा‑आधारित समर्थन: भ्रष्टाचार विरोधी रवैये और ग्राउंड‑अप पहल की वजह से, विशेषकर Gen Z वर्ग में वे एक उम्मीद की किरण बने हुए हैं। प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के त्यागपत्र के बाद हिंसक विरोध प्रदर्शन के बीच—जिसमें संसद भवन जैसे सरकारी संस्थानों को आग लगाई गई—बालेन्द्र शाह ने आंदोलन का समर्थन जारी रखा। उन्होंने विरोध प्रदर्शनकारियों का उत्साह व्यक्त किया और जनांदोलन को भ्रष्ट राजनीतिक व्यवस्थाओं के खिलाफ बदलाव की आवाज़ माना। बालेन्द्र शाह ने नेपाल के Gen Z आंदोलन में एक प्रेरणादायक जननेता के रूप में अपनी पहचान बनाई है। सीधे प्रदर्शन में शामिल न होने के बावजूद, उन्होंने आंदोलन का खुलकर समर्थन किया और युवाओं के अधिकारों, भ्रष्टाचार विरोध और राजनीतिक स्थिरता के लिए खुलकर आवाज उठाई। राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा के बीच वे युवा नेतृत्व और निष्पक्ष शासन के प्रतीक के तौर पर उभरे हैं। ओली के इस्तीफा देने के बाद बालेन्द्र शाह को अगला प्रधानमंत्री बनने की संभावना के रूप में देखा जा रहा है।
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