रवनीत सिंह बिट्टू को इसलिए बनाया गया मंत्री... पंजाब पर मोदी की मेहरबानी के मायने

बताया जा रहा है कि मंत्री के रूप में बिट्टू का नाम खुद अमित शाह ने सुझाया। उन्होंने लुधियाना की एक रैली में कहा भी था कि वह जल्द ही बिट्टू को बड़ा आदमी बना देंगे।

रवनीत सिंह बिट्टू को इसलिए बनाया गया मंत्री... पंजाब पर मोदी की मेहरबानी के मायने

तीन बार के पूर्व सांसद रवनीत सिंह बिट्टू। (फोटो- सोशल मीडिया)

2024 के लोकसभा चुनाव में हालांकि पंजाब से बीजेपी का कोई उम्मीदवार नहीं जीत पाया, फिर भी लुधियाना से हार गए, तीन बार के पूर्व सांसद रवनीत सिंह बिट्टू को मंत्रिपरिषद में जगह दे दी गई है। बिट्टू को स्वयं पीएम ने घर बुलाकर मंत्री पद की पेशकश की। मोदी पंजाब से कोई सिख चेहरा चाहते हैं, जो लंबे समय तक बीजेपी के लिए काम कर सके। इस मामले में बिट्टू लकी साबित हुए हैं, क्योंकि उनकी उम्र केवल 49 साल  है और वह तीन बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत कर संसद पहुँच चुके हैं। हालांकि बीजेपी के पास और भी सिख चेहरे थे, जो इस चुनाव में खड़े थे। अमृतसर से पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू, बठिंडा से पूर्व आईएएस अधिकारी परमपाल कौर सिद्धू और फरीदकोट से गायक हंस राज हंस भी इसी कौम से आते हैं, लेकिन चुना बिट्टू को गया। 

बिट्टू पंजाब के दिवंगत मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं 

बताया जा रहा है कि मंत्री के रूप में बिट्टू का नाम खुद अमित शाह ने सुझाया। उन्होंने लुधियाना की एक रैली में कहा भी था कि वह जल्द ही बिट्टू को बड़ा आदमी बना देंगे। बिट्टू पंजाब के दिवंगत मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं और इस लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल हुए थे। उन्होंने लुधियाना से चुनाव लड़ा, लेकिन पंजाब कांग्रेस के प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा से केवल 20,000 से मतों से हार गए। बिट्टू इसके  पहले 2009 में आनंदपुर साहिब से , 2014 और 2019 में लुधियाना से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा सांसद चुने गए थे। 

बीजेपी आगे अपना ध्यान पंजाब पर लगाना चाहती है

दरअसल बीजेपी आने वाले समय के लिए अपना ध्यान पंजाब पर लगाना चाहती है। खासकर इसलिए कि पंजाब से मोदी सरकार के खिलाफ चले किसान आंदोलन ने लोकसभा चुनाव के नतीजों पर बड़ा असर डाला। बीजेपी के पास पंजाब में ऐसा कोई नेता नहीं था, जो किसानों के साथ मामले को सुलझा सके। बीजेपी को आने वाले दिनों में भी पंजाब में विरोध की हवा दिख रही है। खासकर सिख जाट किसानों ने बीजेपी को किसान विरोधी होने का प्रचार कर रखा है। 

बीजेपी को पंजाब में सीट नहीं मिली, लेकि वोट प्रतिशत बढ़ा

यद्यपि बीजेपी 2024 के चुनाव में लोकसभा की कोई सीट जीतने में कामयाब नहीं रही, लेकिन फिर भी राज्य में उसका वोट प्रतिशत बढ़ा है, इससे पता चलता है कि पंजाब में बीजेपी के लिए संभावनाएं हैं। पंजाब में हिंदू वोटों का स्पष्ट ध्रुवीकरण दिखाया दिया है। पहली बार बीजेपी को रिकॉर्ड 18.56 प्रतिशत वोट मिले हैं। पार्टी 117 विधानसभा क्षेत्रों में से 23 में आगे रही। यानि बीजेपी शहरी हिंदू, और अर्ध-शहरी मतदाता वाले क्षेत्र में मजबूत हुई है। इस चुनाव में तो बीजेपी ने शिरोमणि अकाली दल से 5 प्रतिशत अधिक वोट प्राप्त किये हैं। भाजपा किसान यूनियनों द्वारा विरोध के कारण ही कोई सीट प्राप्त नहीं कर सकी। इसीलिए बीजेपी अब जाट और सिखों के बीच अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश में लगी है। 

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भाजपा ने अबोहर, बल्लुआना, जालंधर सेंट्रल, जालंधर नॉर्थ, राजपुरा, डेरा बस्सी, पटियाला, लुधियाना ईस्ट, लुधियाना साउथ, लुधियाना सेंट्रल, लुधियाना नॉर्थ, लुधियाना वेस्ट, अमृतसर सेंट्रल, अमृतसर ईस्ट, फिरोजपुर सिटी, मुकेरियां, दसूया, होशियारपुर, सुजानपुर, भोआ, पठानकोट और बठिंडा अर्बन के कई विधान सभा क्षेत्रों में बढ़त हासिल करने में सफल रही है। व्यापारियों के शहर लुधियाना के बिट्टू को मंत्री बनाए जाने का असर जरूर होगा। 

भाजपा को नाभा में 22,198, बटाला में 22,674, गुरदासपुर में  21,954 और मोगा में 26,091 वोट प्राप्त हुए। यहां तक कि पंथिक सीट माने जाने वाले खडूर साहिब जैसी सिख बहुल सीटों पर भी भाजपा उम्मीदवार मंजीत मन्ना को पट्टी, कपूरथला, सुल्तानपुर लोधी और बाबा बकाला विधानसभा क्षेत्रों में शिरोमणि अकाली दल से अधिक वोट मिले। इसके अलावा नकोदर, शाहकोट, फरीदकोट और कोटकपूरा जैसे अर्ध-शहरी और छोटे शहरों और कई अन्य बूथों पर भी बीजेपी ने जीत हासिल की, जहां हिंदू मतदाताओं की उपस्थिति अधिक थी। लेकिन पंजाब में किसानों के विरोध के कारण बीजेपी हर जगह अंत में विफल रही। यह भी देखा गया कि पंजाब के ग्रामीण इलाकों में किसान यूनियनों ने भाजपा उम्मीदवारों के प्रचार का लगातार विरोध किया। बीजेपी गुरदासपुर जीतती रही है और आनंदपुर साहिब में भी 50 प्रतिशत से अधिक मतदाता हिंदू हैं, लेकिन वहाँ भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसान विरोध का सामना करना पड़ा।

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